जब दिन का सूरज ढलता है, तो शाम सुहानी होती है
जब शाम का मंज़र चढ़ता है, तो रात दीवानी होती है
जब रात की खामोशी में, मदहोश जवानी होती है
nightclubs/pubs में फिर ,मारामारी होती है
नशे के ज़हर में , Jeckyll भी Hyde बनते हैं
निर्दोष मारे जाते हैं , जब कारें बेकाबू होती हैं
किसी आँचल का फूल पिस्ता है, मगरूर हैवानी होती है
कहा था बाहर मत जाना , मजबूर माँ आंसू रोती है....
जब शाम का मंज़र चढ़ता है, तो रात दीवानी होती है
जब रात की खामोशी में, मदहोश जवानी होती है
nightclubs/pubs में फिर ,मारामारी होती है
नशे के ज़हर में , Jeckyll भी Hyde बनते हैं
निर्दोष मारे जाते हैं , जब कारें बेकाबू होती हैं
किसी आँचल का फूल पिस्ता है, मगरूर हैवानी होती है
कहा था बाहर मत जाना , मजबूर माँ आंसू रोती है....
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